बेचैन आत्मा

12.10.15

लोहे का घर...3

›
आज भी ट्रेन छुक-छुक, छुक-छुक चलती है ।  नहीं बन पाई धड़-धड़, धड़-धड़ चलने वाली बुलेट। एक सपना देखा है हमारे प्रधान मंत्री जी ने, एक सच से स...
4 comments:
11.10.15

रौशनी और अंधेरा

›
रौशनी है लोहे के घर में अँधेरा है खेतों में, गाँवों में जब कोई छोटा स्टेशन करीब आता है खेतों की पगडंडियों में दिखने लगते हैं टार्च ...
8 comments:

सुबह की बातें-1

›
20 सितम्बर, 2015  धमेख स्तूप सारनाथ के सामने बेंच पर लेटा बिन चश्मे के लिख रहा हूँ। 3-4 किमी सड़क पर और कुछ देर घास पर चलने के बा...
6 comments:
4.10.15

मोबाइल

›
सभी जानते हैं कि मोबाइल की बैटरी खत्म होती है तो मोबाइल स्विच ऑफ हो जाता है सिवाय उनके जिनको काम के समय आपका मोबाइल  स्विच ऑफ मिलता है।  द...
6 comments:
3.10.15

मुर्दों की बस्ती में....

›
मुर्दों की बस्ती में सुबह-सुबह शोर है, "सत्य बोलो गत्य है राम नाम सत्य है!" पुरुष अत्महत्या का खयाल छोड़ जनाजे को कांधा देने...
3 comments:
2.10.15

देश ठीके चल रहल हौ बापू!

›
जौन हो रहल हौ तउन ठीक हो रहल हौ बापू, देश ठीके चल रहल हौ बापू। आपके लोग आजो याद करत हउअन। आजो लोग कहलन - सच बोलना अच्छी बात है। गोली आजो च...
3 comments:
28.7.15

श्रद्धांजलि

›
मैं तुम्हें श्रद्धांजलि देना चाहता था ढूँढता रहा गूगल में तुम्हारा कोई ऐसा चित्र जो दिखा दे तुम्हें पूरा जिसे अपलोड कर नीचे लगा...
15 comments:
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.