बेचैन आत्मा
30.4.18
लोहे का घर -42
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आज बनारस से छपरा रूट वाले लोहे के घर में बैठे हैं। सद्भावना सही समय पर चल रही है। इस रूट में भीख मांगने वाले बहुत मिलते हैं। अभी औड़िहार ...
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लोहे का घर-41
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फिफ्टी डाउन दो घंटे लेट है। ट्रेन हो या महबूबा, लेट होना मिलन का शुभ संकेत है। हम टाइम से पहुंच नहीं सकते, वो टाइम पर आ गई तो हमार...
क्षणिकाएँ
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(1) झूठ ....... दिल का थोड़ा थोड़ा टूटना मन का थोड़ा थोड़ा गिरना जिस्म को थोड़ा थोड़ा मारता है लोग झूठ बोलते हैं वो अचानक चला ग...
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27.3.18
माफ़ी
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हम जब छोटे थे तो कक्षा में गुरुजी और घर में बाउजी दंडाधिकारी थे। दोनों को सम्पूर्ण दंडाधिकार प्राप्त था। स्कूल में गलती किया तो मुर्गा बने...
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25.3.18
मेरे राम
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गंगा किनारे फैले बनारस की गलियों में जिसे पक्का महाल कहते हैं, प्रायः घर घर में मन्दिर है। मेरे घर में भी मन्दिर था, मेरे मित्र के घर में ...
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3.3.18
लोहे का घर-40 (बनारस से लखनऊ)
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आज फिर झटके वाली बेगमपुरा में बैठा हूं। हम समझते थे जब हम डाउन होते हैं तभी झटके मारती है लेकिन ये तो अप में भी मार रही है! मतलब झटक...
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लोहे का घर-39
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उंगलियों में गुलाब पकड़े मीलों चले हैं पैदल-पैदल न झरी एक भी पंखुड़ी न भूले राह मंजिल से पहले। वेलेंटाइन के दिन भी पटरियों पर दौ...
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