बेचैन आत्मा
12.5.18
लोहे का घर-43
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भारतीय रेल में सफ़र करते करते जिंदगी जीने के लिए जरूरी सभी गुण स्वतः विकसित होने लगते हैं। धैर्य, सहनशीलता, सामंजस्य आदि अगणित गुण हैं जो ...
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6.5.18
अभागन की शादी
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किशन लाल परेशान थे। हों भी क्यों न? बेटी जवान हो चुकी और अभी तक शादी के लिए योग्य तो क्या अयोग्य वर भी नहीं मिला! बेटी पढ़ी लिखी, खूबसूरत ...
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30.4.18
लोहे का घर -42
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आज बनारस से छपरा रूट वाले लोहे के घर में बैठे हैं। सद्भावना सही समय पर चल रही है। इस रूट में भीख मांगने वाले बहुत मिलते हैं। अभी औड़िहार ...
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लोहे का घर-41
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फिफ्टी डाउन दो घंटे लेट है। ट्रेन हो या महबूबा, लेट होना मिलन का शुभ संकेत है। हम टाइम से पहुंच नहीं सकते, वो टाइम पर आ गई तो हमार...
क्षणिकाएँ
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(1) झूठ ....... दिल का थोड़ा थोड़ा टूटना मन का थोड़ा थोड़ा गिरना जिस्म को थोड़ा थोड़ा मारता है लोग झूठ बोलते हैं वो अचानक चला ग...
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27.3.18
माफ़ी
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हम जब छोटे थे तो कक्षा में गुरुजी और घर में बाउजी दंडाधिकारी थे। दोनों को सम्पूर्ण दंडाधिकार प्राप्त था। स्कूल में गलती किया तो मुर्गा बने...
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25.3.18
मेरे राम
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गंगा किनारे फैले बनारस की गलियों में जिसे पक्का महाल कहते हैं, प्रायः घर घर में मन्दिर है। मेरे घर में भी मन्दिर था, मेरे मित्र के घर में ...
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