बेचैन आत्मा

26.9.18

लोहे का घर-49

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तेरा घर खूब बड़ा होगा, मेरा घर खूब लंबा है। तेरे घर की खिड़की का आकार बड़ा होगा, मेरे घर की खिड़की का आकाश बड़ा है। ते...
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21.9.18

बेटियों को पढ़ाने से पहले...

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बेटियों को पढ़ाने से पहले सोच लो तुम पढ़ गयीं तो ज्ञान की बातें करेंगी रोज तुमसे सुन सकोगे? सूर्य को देवता कहते हो तुम तो आग का ...
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29.8.18

परिंदे

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दिन के शोर में गुम हो गए भोर के प्रश्न अपने-अपने घोसलों से निकल फुदकते रहे परिंदे। शाम की शिकायत सुनते सुनते रात बहरी हो गई बोलत...
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28.8.18

हे कृष्ण!

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कभी बीनता था झाँवाँ  रेल पटरियों के किनारे सजाता था पहाड़  मनाता था कृष्ण जन्माष्टमी आज बैठा हूँ ट्रेन में देख रहा हूँ गि...
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27.8.18

लोहे का घर - 48 (यम की आहट)

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वे पतंजलि आश्रम हरिद्वार से अपने घर आरा लौट रहे थे। लगभग मेरी ही उम्र के थे लेकिन बीमारी ने उन्हें जीर्ण शीर्ण बना दिया था।  पेशाब की थैली...
25.8.18

लोहे का घर -47(एक प्रेम कथा)

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फिफ्टी डाउन अपने सही समय पर चल रही थी। हम जहां बैठे थे वहीं एक युवा परिवार सफ़र कर रहा था। बीमार सी दिखने वाली पत्नी, तीन छोटे-छोटे मैले क...
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24.8.18

सत्ता

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चांद दिन में सूरज से कोई प्रश्न नहीं करता जानता है सही वह जिसके पास है सत्ता। सूरज रात में  चांद पर रोशनी लुटा कर  ...
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