बेचैन आत्मा

28.6.22

सायली छन्द

›
(1) चिड़िया पानी पीने मेरे आँगन आई भरे प्याले चहचहाई। ............... (2) भूखी रोटी पकाई बेटा घर आया खाना खाया तृप्त। ....... (3) पतंग पेंचा ...
1 comment:
29.5.22

आधी रोटी चोर!

›
बनारस की एक गली में चीखते-चिल्लाते लड़कों का एक झुण्ड करीब आ रहा था। आगे-आगे एक विक्षिप्त बुढ़िया भागे जा रही थी। लड़के पास आते तो वह जमीन से उ...
11 comments:
25.5.22

साधू

›
एक बार यमराज को कुम्भ मेले में त्रिवेणी दर्शन का मोह जगा। प्रयागराज में गंगा नदी के तट पर एक कुटिया बनाकर रहने लगे। बगल की कुटिया में एक स्व...
4 comments:
19.5.22

घड़ा

›
पीपल के पेड़ पर माटी के कलश लटके होते हैं। माना जाता है कि मरने के बाद आदमी 12 दिनों तक प्रेत योनि में भटकता है, तेरहवें दिन श्राद्ध हो जाने ...
6 comments:
14.5.22

इत्र की शीशियाँ

›
वर्षों पहले की बात है। तब टीवी, मोबाइल नहीं था, भारत को आजाद हुए दो दशक ही बीते थे। चेतगंज में घर था, कोई रिक्शा नहीं मिला तो हम दो भाई बनार...
3 comments:
7.5.22

हाथ

›
 एक दिन दाएं हाथ ने चुपके से एक मुसीबत के मारे की मदद कर दी। बाएं हाथ को पता चल गया लेकिन कुछ न बोला। एक दिन बाएं हाथ ने भी एक मुसीबत के मार...
2 comments:
15.4.22

सोचो तो....

›
वे दिन भी क्या दिन थे! हम थे, तुम थे और साफ थीं गङ्गा जी पोतते थे जिस्म में मिट्टी, तैरते थे घण्टों और भूख लगने पर  खा लेते थे  ककड़ी, हिरमान...
3 comments:
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.