बेचैन आत्मा
20.4.11
मोरनी का दर्द
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हे ईश्वर ! सारी सुंदरता मोर पर उढ़ेलता है मुझे लगता है तू भी लिंग भेद करता है ! आकर्षक रंग सुंदर रूप नीली लचकदार गरदन खूबसूरत लम्बी पूंछ ...
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17.4.11
शंका
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ऊषा की सुनहरी किरणों से संध्या की लाली से सशंक रहता है चकोर कहीं मेरे चाँद को रंग न दें अपने रंग में ! काले बादलों की ओट से हँसता-...
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14.4.11
तनहाई नहीं रहती.............
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तनहाई नहीं रहती जब कोई नहीं होता सुबह-सबेरे चहचहाते पंछी (थोड़ा सा दाना फेंको, पानी का कटोरा भर दो, मस्त हो गीत गाते हैं।) दिन भर क...
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10.4.11
डाल में आ गए जब टिकोरे बहुत......( री पोस्ट )
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डाल में आ गए जब टिकोरे बहुत बाग में छा गए तब छिछोरे बहुत पेड़ को प्यार का मिल रहा है सिला मारते पत्थरों से निगोड़े बहुत धूप में क्या खिल...
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9.4.11
जीत का जश्न
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संघर्ष में जनता की जीत हुई। सरकार को झुकना पड़ा। यह राजतंत्र नहीं है कि राजा का तख्ता पलट दिया जाता और दूसरा निरंकुश तानाशाह राजगद्दी पर ब...
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5.4.11
अंधेर नगरी चौपट्ट राजा
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जब से अन्ना हजारे के आंदोलन के बारे में पढ़ा है तभी से भाततेन्दु हरिश्चंद्र के नाटक अंधेर नगरी चौपट्ट राजा की बहुत याद आ रही है। मैने तो स्...
24 comments:
3.4.11
मूर्ख दिवस की यादें, विश्व कप की बधाई व नवसंवत्सर की ढेरों शुभकामनाएँ....सब एक साथ।
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आज आनंद का दिन था। बहुत दिनों के बाद वह दिन आया जब दफ्तर में छुट्टी थी, श्रीमती जी ने अत्यंत जरूरी गृह कार्य भी नहीं सौंपा था और न ही मुझे ...
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