सुबह ने कहा..
बहुत ठंड है, सो
जाओ।
दिमाग ने कहा…
उठो ! ऑफिस जाओ !!
धूप ने कहा..
यूँ उंगलियाँ न
रगड़ो
आओ ! मजे लो।
दिमाग ने कहा…
बहुत काम है !
शाम ने कहा….
घूमो ! बाजार में बड़ी रौनक है।
दिमाग ने कहा...
घर में पत्नी है,
बच्चे हैं, जल्दी घर जाओ !
रात ने कहा...
मैं तो तुम्हारी
हूँ
ब्लॉग पढ़ो ! कविता लिखो।
दिमाग ने कहा...
थक चुके हो
चुपचाप सो जाओ !
हे भगवान !
तू अपना दिमाग
छीन क्यों नहीं लेता !!
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