2.2.26

बनारस

बिछी लाशें और जलती चिताओं के ऊपर
एक पतंग उड़ रही थी,
कोई
ठुमका लगा रहा था और वह
ठुमक-ठुमक
उछल रही थी!
मणिकर्णिका घाट था वह।

बगल में
हर हर महादेव के नारे लग रहे थे
गंगा स्नान के बाद
भक्त
दर्शन के लिए जा रहे थे
विश्वनाथ धाम था वह।
मणिकर्णिका के बगल में
सिंधियाघाट 
ऊपर संकठा माता का मन्दिर 
अन्नकूट का शृंगार था वहाँ।

यह कोई
नई बात नहीं थी,
चिताएं कभी बुझती नहीं, 
पतंग रोज उड़ता है,
हर हर महादेव के नारे रोज लगते हैं
अन्नकूट न सही
माँ संकठा की आरती 
रोज होती है।

बनारस 
जितना मरना जानता है उतना जीना जानता है
उसे मालूम है,
"राम नाम सत्य है।"
........

1 comment:

  1. वाह | पर पतंग को उड़ता है में न डालिये हजूर :)

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