बेचैन आत्मा
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15.4.16
आस्था, ईश्वर और प्यार
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बात आस्था की, विश्वास की, प्रेम की थी पत्थर को भी हमने भगवान बना दिया. बात नफ़रत की, अविश्वास की, छल की थी भगवान को भी तुमने पत्थर समझ लिया...
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