30.8.26

जलेबा कजरी

आज 30 अगस्त 2026 'जलेबा-कजरी/रतजगा' है - बनारस का अपना त्योहार।

भादों महीने में कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज / कजरी रतजगा मनाई जाती है। इसी दिन को बनारस में *जलेबा-कजरी* कहते हैं। 

काशी में इस दिन की रात को महिलाएं नीमड़ी माता और शिव-पार्वती की पूजा करके पूरी रात कजरी गा कर रतजगा करती हैं। पहले मोहल्लों में ढोलक पर कजरी की तान सुनाई देती थी।

 इस रात पुरुष और बच्चे व्रत नहीं रहते, तो परम्परा है कि वो रात भर जलेबा (बड़ी जलेबी) खाते हैं। शाम से ही सारनाथ, पांडेयपुर, आशापुर, चौक, अस्सी हर जगह जलेबा की अस्थाई दुकानें सजी हैं।

आज शाम बौधायन सोसाइटी के प्रकल्प "बोधिश्री" के बैनर तले आदरणीय मंजरी पाण्डेय जी के आवास पर संस्था के सदस्यों ने जम कर जलेबा और कजरी का आनंद लिया और पहली बार आए सदस्यों ने अपना परिचय दिया। वीडियो लिंक कमेंट में है।



















 

12.3.26

समाजवाद: प्रयोग और पतन

 कल शाम 11 मार्च को राजकीय पुस्तकालय, वाराणसी में प्रो. इंदीवर जी की पुस्तक 'समाजवाद: प्रयोग और पतन' का भव्य लोकार्पण हुआ।  समारोह में अध्यक्ष: प्रो दीपक मलिक, मुख्य अतिथि: एम. एल. सी. धर्मेंद्र राय, मुख्य वक्ता: प्रो. सुरेंद्र प्रताप, वरिष्ठ पत्रकार: प्रदीप कुमार, डॉ प्रज्ञा, प्रो. श्रद्धानन्द के अलावा शहर के कई वरिष्ठ बुद्धिजीवी लेखक उपस्थित थे। लोकार्पण के बाद काव्यगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।















27.2.26

धरोहर ( एकादश पुष्प)

साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास वाराणसी का संयुक्त आयोजन। हिन्दी की धरोहर-काशी की सृजन-परम्परा। जन्मशती वर्ष में संकल्पित श्रृंखला का एकादश पुष्प।