12.3.26

समाजवाद: प्रयोग और पतन

 कल शाम 11 मार्च को राजकीय पुस्तकालय, वाराणसी में प्रो. इंदीवर जी की पुस्तक 'समाजवाद: प्रयोग और पतन' का भव्य लोकार्पण हुआ।  समारोह में अध्यक्ष: प्रो दीपक मलिक, मुख्य अतिथि: एम. एल. सी. धर्मेंद्र राय, मुख्य वक्ता: प्रो. सुरेंद्र प्रताप, वरिष्ठ पत्रकार: प्रदीप कुमार, डॉ प्रज्ञा, प्रो. श्रद्धानन्द के अलावा शहर के कई वरिष्ठ बुद्धिजीवी लेखक उपस्थित थे। लोकार्पण के बाद काव्यगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।















27.2.26

चर्चा

साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास वाराणसी का संयुक्त आयोजन। हिन्दी की धरोहर-काशी की सृजन-परम्परा। जन्मशती वर्ष में संकल्पित श्रृंखला का एकादश पुष्प।




त्रिलोक नाथ पाण्डेय।

 






15.2.26

तुम्हारी ग़ज़ल

दिनांक 14 फरवरी 2026, उदगार सभागार में प्रियंका तिवारी के ग़ज़ल संग्रह तुम्हारी ग़ज़ल के लोकार्पण समारोह की कुछ तस्वीरें।

















12.2.26

बसंत

आ! बसंत मंजर-सा हँसने

मेरे ताश महल में


पिछले बरस चली थी आँधी 

महल उड़ा, तिनके-सा

मैं तो खुद कुछ देख न पाया

बिखर गया मनके-सा


क्यों बिजली हर बार गिरेगी

मेरे आस महल में?


ओरे-बोरे दर्द छुपाया

आँसू कथरी-कथरी 

टांका बस पैबंद उम्र भर

भटका नगरी-नगरी


कमी नहीं कोई पाओगे

मेरे चहल-पहल में


क्या निर्धन की किस्मत में है

शीत, ताप ही सहना

क्या अमीर के कब्जे में ही

तुमको हरदम रहना


बना लिया क्या डेरा नियमित

तुमने राज महल में!

.... @देवेन्द्र पाण्डेय।

9.2.26

Rahul weds priyanka

 प्रिय पन्ना लाल पटेल जी के पुत्र राहुल के विवाह समारोह में।







2.2.26

शतरंज

कड़ाकी ठण्ड में 
पने राजा, अपनी रानी और अपने सिपाहियों के साथ 
श्वेत, श्याम रंग के
कुछ जानवर 
एक डिब्बे में कठुआए 
एक दूसरे से चिपके पड़े थे
न कोई झगड़ा, न कोई रगड़ा
ॐ शान्ति।

तभी

काला, सफेद चौसँठ खाने वाला बोर्ड लेकर

दो आदमी आए 

सभी में प्राण फूँक जगाए

आमने-सामने बैठ कर रंग बाँट लिए

तुम काला, हम सफेद,

दोनो राजा

आपस में लड़ने लगे!


एक-एक कर

कभी पैदल, कभी घोड़ा....

सभी शहीद होने लगे

तभी

एक आदमी बोला-मात!

दूसरे ने मायूस होकर स्वीकार किया अपनी हार।


अगले ही पल

दोनो आदमी

मोहरों को डिब्बे में भरने लगे

राजा-रानी के साथ

सभी जानवर, पहले की तरह

कठुआए, एक दूसरे से चिपककर गहरी नींद सो गए।


यह सब देख 

आकाश में विचरण करते देवता 

ठहाके लगाने लगे-

हमने मनुष्य बनाए 

लेकिन उनको

लड़ना/लड़ाना तो नहीं सिखाया था

यह खेल इन्होने 

अपने से सीखा है।

......