बेचैन आत्मा

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8.2.21

शत्रुता

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मैने मांगा,  जाड़े की धूप उसने दिया, घना कोहरा! मैने पूछा, "ठंडी कब जाएगी?" उसने कहा, "थोड़ी बर्फवारी होने दो।" मैने पूछा,...
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2.9.17

प्रकृति (सब गम भुलाकर जीना सिखाती है)

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बारिश से पहले तेज हवा चली थी झरे थे कदम्ब के पात छोटे-छोटे फल दुबक कर छुप गये थे फर-फर-फर-फर उड़ रहे परिंदे तभी उमड़-घुमड़ आये बदरी...
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