बेचैन आत्मा
28.3.10
पानी की मार
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बचपन में जब जाता था परीक्षा देने या जब जाते थे पिताजी घर के बाहर दूर किसी काम से तो माँ झट से रख देतीं थीं दरवाजे पर दो भरी बाल्टिया...
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21.3.10
एक हिंदी गज़ल
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क्या तेरा क्या मेरा पगले चार दिनों का फेरा पगले छोरी-छोरा छुट जाएंगे उठ जाएगा डेरा पगले पत्थर का दिल क्यों रखता है तन माट...
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14.3.10
तू है कौन, कौन हैं तेरे
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आज रविवार है. कविता पोस्ट करने का दिन. मार्च ..वित्तीय वर्ष का अंतिम महिना, बच्चों की परीक्षा और उसपर चैत की मस्ती. अपने 'नववर्ष' क...
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7.3.10
भवानी दीदी
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एक थी भवानी दीदी कहते थे जिसे सभी पगली ! सुबह-सबेरे बरामदे में बैठकर बीनती थी कंकड़ फेंकती थी चावल गाती थी गीत "आ चरी आ.... फुर्र उड़ी ...
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28.2.10
छाना राजा...
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सभी को होली के शुभ अवसर पर भांग की ठंडाई, एक बीड़ा मस्त बनारसी मगही पान और ढेरों शुभकामनाएँ मेरी कामना है कि आप सपरिवार होली की मस्ती में यू...
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21.2.10
फागुन का त्यौहार
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फा गु न का त्यौ हा र जले होलिका भेदभाव की, आपस में हो प्यार तब समझो आया है सच्चा, फागुन का त्यौहार हो जाएँ सब प्रेम दीवाने दिल में जाग...
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14.2.10
भांग में बहुत मजा हौ
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महाशिवरात्रि के दिन 'बाबा' का दर्शन कर लौट रहा था. सुबह से बारिश हो रही थी और पूरी तरह भींग चुका था. गोदौलिया चौर...
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