बेचैन आत्मा

28.4.12

नग्नता

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एक समय था जब हम सभी नंगे थे सभी के पास पेट था मुँह था और थी कभी न खत्म होने वाली भूख भूख ने श्रम श्रम ने भोजन भोजन ने जीवन ...
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26.4.12

हमारी सरकार !

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मंदिर के सामने पीपल के नीचे पक्के फर्श पर वह प्रतिदिन निर्धारित समय पर बिखेरता है पंछियों के लिए दाना। थोड़ी ही देर में...
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25.4.12

गंगा चित्र-3

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हर गंगे, हर हर गंगे तेरे आगे सब नंगे।
24.4.12

गंगा चित्र-2

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कोई पूरब से आता है, कोई आता पश्चिम से......... धुलते हैं सब पाप उसी के, जो होते मन के चंगे हर गंगे, हर हर गंगे।
23.4.12

गंगा चित्र-1

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तेरे आगे सब नंगे हर गंगे, हर हर गंगे।
21.4.12

तेरे आगे सब नंगे

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तेरे आगे सब नंगे हर गंगे, हर हर गंगे। कोई पूरब से आता है कोई आता पश्चिम से कोई उत्तर से आता है कोई आता दक्षिण से धु...
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18.4.12

सब्जी महंगी है न ?

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सब्जी बाजार में भटकते-भटकते थक हार कर देर शाम अपनी वाली सब्जी की दुकान से सब्जी खरीदने गया तो देखा सभी हरी सब्जियाँ बिक चुकी थीं। आलू, टम...
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