बेचैन आत्मा

11.8.12

कृष्ण लीला।

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बाजार से झाँवाँ, करौंदे व अशोक की पत्तियाँ खरीदते लोग। वैसी ही एक दूसरी दुकान। यह उम्र तो खिलौनौ से खेलने की है ...
10.8.12

जन्माष्टमी

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कल श्री कृष्ण जन्माष्टमी है। आनंद श्रीकांत के उत्साह से उत्साहित है। वह पुराने लोहे के बक्से से अपने खिलौने निकाल रहा है। चीनी मिट्टी क...
9.8.12

हे कृष्ण !

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जन्माष्टमी में तुम्हारी याद आती है। छाछ-मक्खन दही-मलाई याद आती है साथ खेले साथियों की याद आती है बांसुरी की धुन अ...
24 comments:
5.8.12

चलिए गंगा जी चलें....

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पिछली पोस्ट एक शाम गंगा के नाम में आपने देखा था कि गंगा जी बढ़ रही हैं। मैने लिखा था कि अब एक घाट से दूसरे घाट की ओर जाना संभव नहीं। अब श...
31 comments:
3.8.12

वृक्ष और परिंदे

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परिंदे बैठ जाते हैं वृक्ष की सबसे ऊँची फुनगी पर जब पड़ती है फुहार छुप जाते हैं भाग कर घने पत्तियों की आड़ में जब होती ह...
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