बेचैन आत्मा
17.2.13
दुन्नो हाथे लढ्ढू
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दुन्नो हाथे में लढ्ढू 'हीरो' कब्बो ना मिली लड़की चहबे फैंटास्टिक, नखरा झेले के परी। दुन्नो हाथे में लढ़्ढू 'राजा' कब्ब...
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11.2.13
आलू-चना।
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अच्छा खासा रविवार था। अच्छा इसलिए कि छुट्टी थी और खासा इसलिए कि मुझे कोई खास काम नहीं था। फरवरी की उतरती ठंड थी, नहाया था और स्वच्छ वस्त्...
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10.2.13
ब्लॉगर को सम्मान
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जनसंदेश टाइम्स, बनारस के 6 फरवरी 2013 को एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में शनीवार, 9 फरवरी को बनारस के होटल आइडियल टॉवर में एक भव्य समारोह...
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9.2.13
शब्दों की रोशनी
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अंधेरी राह में घने वृक्षों के पास कुछ शब्द दिखे गुच्छ के गुच्छ! जुगनुओं की तरह आपस में टकराते, बिखरते, फिर लौट आते... शायद वहीं ज...
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29.1.13
थका मादा
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देर शाम सब्जियों का भारी झोला उठाये लौटते हुए घर चढ़ते हुए फ्लैट की सीढ़ियाँ सहसा कौंध जाती है ज़ेहन में पत्नी के द्वारा दी गई ...
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27.1.13
चश्मा
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चश्मा ले लो, चश्मा! हिंदू चश्मा मुस्लिम चश्मा अगड़ा चश्मा पिछड़ा चश्मा अनुसूचित जाति का चश्मा जन जाति का चश्मा भांति-भांति का चश्...
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22.1.13
ये नेता हैं या मच्छर हैं...!
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फेसबुक में अक्षरों को पढ़ता हूँ। नेताओं पर लिखे स्टेटस को पढ़ता हूँ तो लगता है नेता भी मच्छर की तरह हैं। अक्षर-अक्षर मच्छर नज़र आते हैं। सो...
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