बेचैन आत्मा

25.5.13

धोबी के गधे

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धोबी के गधे प्रायः इस बात से दुखी रहते हैं कि दूसरे, उससे कम बोझ क्यों उठाते हैं ? धोबी, उसी पर अधिक बोझ क्यों लादता है?  वे...
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17.5.13

अंधेरे की वजह

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घाटशिला की यात्रा यूँ तो मैने बिटिया के समर इन्टर्नशिप के चक्कर में मजबूरी में की थी लेकिन इस यात्रा ने मुझे अग्निमित्र से मिला दिया। देश...
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13.5.13

स्वर्ण रेखा नदी

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तेरा असली नाम क्या है, स्वर्ण रेखा नदी? तू उस देश में बहती है जिस देश को कभी ‘ सोने की चिड़िया ’ कहते थे, उस राज्य में बहती ह...
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11.4.13

ज़िंदगी

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सबेरा बच्चे सा हँसने लगा कभी पंछी कभी तितली कभी फूल धूप खि ली जानवर हो गया! बदलने लगा गिरगिट की तरह रंग कभी कुत्ता ...
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30.3.13

संभावना

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अटके हो किसी के आस में तो झरो! जैसे झरते हैं पत्ते पतझड़ में रूके हो किनारे साथी की तलाश में तो बहो! तेज धार वाली नदी में बिन मा...
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28.3.13

कहाँ गई होली...!

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बसंत आया सरसों के फूल खिले गेहूँ की बालियाँ लहलहाईं झूमने लगे अरहर सूखी सनाठी को पकड़कर इक-दूजे से लिपटने लगीं लताएँ धरती माँ न...
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17.2.13

दुन्नो हाथे लढ्ढू

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दुन्नो हाथे में लढ्ढू 'हीरो' कब्बो ना मिली लड़की चहबे फैंटास्टिक, नखरा झेले के परी। दुन्नो हाथे में लढ़्ढू 'राजा' कब्ब...
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