बेचैन आत्मा

12.7.17

अब तो दर्शन दे दे

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धोबियाsss धुल दे  मोरी चदरिया  मैं ना उतारूँ  ना एक जनम दूँ खड़े-खड़े मोरी  धुल दे चदरिया! आया तेरे घाट बड़ी  आस लगा क...
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8.7.17

बरसात

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उमड़-घुमड़ जब बादल गरजते हैं तो मनोवृत्ति के अनुरूप सभी के मन में अलग-अलग भाव जगते हैं। नर्तक के पैर थिरकने लगते हैं, गायक गुनगुनाने लगते है...
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3.7.17

नाता

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बाहर लाख अँधेरा हो उजाला है लोहे के घर में मौन हैं अंधेरे में डूबे हुए खेत हलचल है घर में बाहर भी श्रमिक थे, किसान थे जब तक ...
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बाहर का संसार

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पटरी के किनारे मालगाड़ी से सीमेंट की बोरियाँ उतारकर बीड़ी, खैनी के साथ बतकही कर रहे हैं ढेर सारे मजदूर चीखता है ट्रेन का इंजन घबरा...
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2.7.17

बारिश में भीगे?

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सुहानी शाम आई मन सशंकित हो गया तेरे शहर में आज बारिश हुई होगी! खुद से खपा दिन भर का तपा ठंडी हवाओं के स्पर्श से भी चकरा जाता है ...
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30.6.17

आत्महत्या

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बहुत दर्द होता है मरने से पहले एक बार मर जाओ तो आसान होता है जीना! हँसो मत अपने जीवित होने का सुबूत दो मरने के बाद जानते हो क्या...
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26.6.17

लोहे का घर-27

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गेंहूँ की कटाई जोरों पर है.  जहाँ देखो  वहीं खड़ी फसल से ज्यादा  कटे ढेर दिख रहे हैं.  कहीँ-कहीं दवाई  भी चल रही है,  कहीं ...
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