बेचैन आत्मा
4.2.18
लोहे का घर-36
›
ठंडी में बेगमपुरा मिली। और सभी ट्रेनें अत्यधिक लेट हैं। यह भी अपने समय के अनुसार अत्यधिक लेट है मगर रोज के यात्रियों के समय पर है। नेट में...
2 comments:
28.1.18
बजट
›
सभी अपनी अपनी हैसियत के हिसाब से बजट बनाते हैं। सरकार और व्यापारी साल भर का, आम आदमी महीने भर का और गरीब आदमी का बजट रोज बनता/बिगड़ता है। ...
3 comments:
नदी की व्यथा
›
जब कोई ट्रेन हवा से बातें करते हुए पुल पार करती है बहुत शोर करता है पुल शांत दिखती है नदी। आदमियों को लोहे के घर में बै...
2 comments:
23.1.18
बसंत
›
ठंड की चादर ओढ़ दाहिने हाथ की अनामिका में अदृश्य हो जाने वाले है राजकुमार की जादुई अंगूठी पहन कर चुपके से धरती पर आता है बसंत तुमको भ...
4 comments:
20.1.18
लोकतंत्र का बसंत
›
काशी में मराठी भाषा का एक कथन मुहावरे की तरह प्रयोग होता रहा है.. "काशी मधे दोन पण्डित, मी अन माझा भाऊ! अनखिन सगड़े शूंठया मांसह।...
2 comments:
14.1.18
पुस्तक मेला और साहित्यकार
›
एक बार बलिया के पशु मेले में गए थे, एक बार दिल्ली के पुस्तक मेले में। दोनों मेले में बहुत भीड़ आई थी। जैसे पशु मेले में लोग पशु खरीदने कम,...
14 comments:
7.1.18
लोहे का घर-35
›
लोहे के घर में तास खेलने वालों की मंडली में एक सदस्य कम था और तीन साथियों ने मुझे खेल से जोड़ लिया। उधर कलकत्ता जा रहे बंगाली परिवार के बच...
‹
›
Home
View web version