बेचैन आत्मा
27.3.18
माफ़ी
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हम जब छोटे थे तो कक्षा में गुरुजी और घर में बाउजी दंडाधिकारी थे। दोनों को सम्पूर्ण दंडाधिकार प्राप्त था। स्कूल में गलती किया तो मुर्गा बने...
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25.3.18
मेरे राम
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गंगा किनारे फैले बनारस की गलियों में जिसे पक्का महाल कहते हैं, प्रायः घर घर में मन्दिर है। मेरे घर में भी मन्दिर था, मेरे मित्र के घर में ...
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3.3.18
लोहे का घर-40 (बनारस से लखनऊ)
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आज फिर झटके वाली बेगमपुरा में बैठा हूं। हम समझते थे जब हम डाउन होते हैं तभी झटके मारती है लेकिन ये तो अप में भी मार रही है! मतलब झटक...
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लोहे का घर-39
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उंगलियों में गुलाब पकड़े मीलों चले हैं पैदल-पैदल न झरी एक भी पंखुड़ी न भूले राह मंजिल से पहले। वेलेंटाइन के दिन भी पटरियों पर दौ...
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लोहे का घर-38 (बनारस से दिल्ली)
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यह लोहे का घर जरा हट कर है। इसमें सभी गरीब ए.सी. में सफ़र करते हैं। कोई भेदभाव नहीँ। न जनरल, न स्लीपर सभी ए. सी. कमरे। नाम भी क्या बढ़िया! गरी...
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लोहे का घर-37
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39gtc गोरखा रेजीमेंट की मिलेट्री छावनी के किनारे किनारे चल रही है अपनी ट्रेन। काले नाली सी वरुणा नदी के पार भी हैं बबूल के जंगल। ये कांटे ...
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वेलेंटाइन
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खत में गुलाब क्या आया! बिचारे कवि जी की खाट खड़ी, बिस्तरा गोल हो गया। उसने लाख अपने श्री मुख से अपनी श्रीमती को समझाने का प्रयास किया कि आ...
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