बेचैन आत्मा
26.1.19
बसंत
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ठंड की चादर ओढ़ दाहिने हाथ की अनामिका में अदृश्य हो जाने वाले राजकुमार की जादुई अंगूठी पहन कर चुपके से धरती पर आता है बसंत तुमको भला ...
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21.1.19
खिचड़ी
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हमारे देश मे दरवाजा बंद करना कभी सुहागरात की निशानी होती थी, अब स्वच्छता अभियान की पहचान है। इसके लिए आदरणीय अमित सर और दूरदर्शन के शुक्...
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13.1.19
ये पतंगें
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तेरी नीयत तेरे मंझे तू ही जाने मैं साथ रहना चाहता हूँ इन पतंगों के! ये पतंगें बादलों में धूप लिखना चाहती हैं। आकाश में छाई है ब...
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31.12.18
इक्कीसवीं सदी का टीन एज
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अफसोस मत कर इक्कीसवीं सदी अभी अपने टीन एज के आखिरी साल में प्रवेश कर रही है और हम पचपन पार हो गए! अफसोस मत कर चाँद पर घर बनाने और...
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30.12.18
जाड़े की धूप
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आज मैंने भी तुमसे खूब प्यार किया आज तुमने भी मेरा खूब साथ दिया। छत पर चढ़ा तो झट से लिपट गई मुझसे थोड़ा ठहरा तो जी भर के मुझे गर्म किया। ...
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बच्चे और गुब्बारे, बाल दिवस
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एक बच्चा सांता बनकर गुब्बारे बांटता है। एक बच्चा गुब्बारे पा कर खुश होता है। हमारे देश में तीसरा बच्चा भी रहता है जो न गुब्बारे बां...
22.12.18
ओ दिसम्बर! (5)
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जानता हूँ जाते-जाते अनगिन जादू दिखलाएगा हिम शिखरों से झौआ भर-भर बादल, कोहरा ले आएगा अभी तो मफलर जैकेट से ही काम चल रहा अपना दिन...
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