बेचैन आत्मा
27.4.19
बनारस की गलियाँ-9(कर्फ्यू)
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अच्छा है बनारस की पूरी एक युवा पीढ़ी देखे बिना जवान हो गई लेकिन अपने किशोरावस्था में हमने खूब देखे कर्फ्यू। गंगा तट के ऊपर फैले पक...
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25.4.19
बनारस की गलियाँ-8
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बनारस की एक गली गली में चबूतरा चबूतरे पर खुलती बड़े से कमरे की खिड़की खिड़की से झाँको कमरे में टी.वी. टी.वी. में दूरदर्शन एक से बढ़कर एक...
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24.4.19
लोहे का घर-51
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लोहे के घर की खिड़की से बाहर झाँक रहे हैं एक वृद्ध। सामने की खिड़की पर उनकी श्रीमती जी बैठी हैं। वे भी देख रही हैं तेजी से पीछे छूटते खे...
बनारस की गलियाँ-7 (क्रिकेट)
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गली में बच्चे खेलते थे क्रिकेट बड़े पान की दुकान के पास खड़े-खड़े देर तक सुनते रहते थे कमेंट्री बूढ़े चबूतरे पर बैठ क...
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21.4.19
बनारस की गलियाँ-6
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ढूँढ रहा था अपने ही शहर की गलियों में भटकते हुए बचपन का कोई मित्र जिसके साथ खेले थे हमने आइस-पाइस, विष-अमृत या लीलो लीलो पहाड़िया. हार कर ब...
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20.4.19
बनारस की गलियाँ-5
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गली में भीड़ देख ठिठक जाते थे कदम घुसकर झाँकते थे हम भी चबूतरे पर बिछी होती थी शतरंज की बाजी खेलने वाले तो दो ही होते थे चाल बताने...
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बनारस की गलियाँ-4 (प्रभु दर्शन)
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सोम से रवि तक अलग-अलग सभी भगवानों के दिन निर्धारित हैं। जब हम छोटे थे जाते थे समय निकाल निर्धारित वार निर्धारित भगवान के दरबार सोम...
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