बेचैन आत्मा

14.7.19

न बिकने वाले घोड़े

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वह अस्तबल नहीं, देश का जाना माना, एक प्राइवेट प्रशिक्षण संस्थान था जहाँ देश भर से घोड़े उच्च शिक्षा के लिए आते। संस्थान में कई घोड़े थे। माल...
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12.7.19

लोहे का घर-54

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ट्रेन बहुत देर से रुकी थी। उस प्लेटफॉर्म पर रुकी थी जहाँ उसे नहीं रुकना चाहिए। ऐसे रुकी थी जैसे पढ़ाई पूरी करने के बाद, नौकरी की तलाश में, ...
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22.6.19

लोहे का घर-53

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इस मौसम की पहली बारिश हुई जफराबाद स्टेशन में। झर्र से आई, फर्र से उड़ गई। ढंग से सूँघ भी नहीं पाए, माटी की खुशबू। प्रयागराज जान...
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18.6.19

पिता जी

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         गंगा की लहरें, नाव, बाबूजी और तीन बच्चे। इन तीन बच्चों में मैं नहीं हूँ। तब मेरा जन्म ही नहीं हुआ था। पिताजी के साथ अपनी ...
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लोहे का घर-52

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गरमी के तांडव से घबराकर घुस गए ए. सी. बोगी में। दम साधकर बैठे हैं लोअर बर्थ पर। बाहर प्रचण्ड गर्मी, यहाँ इतनी ठंडी कि यात्री चादर ओढ़े लेटे...
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गर्मी का ताण्डव

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इतने तनाव में क्यों हो? धूप में पैदल चलकर आ रहे हो?  नहीं भाई, समाचार देख कर आ रहा हूँ।  अरे! रे! रे! इतना जुलुम क्यों किया अपने ऊपर? ...
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4.6.19

हे माँ शारदे !

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कुछ शब्द दो गूँथ कर  सारे जहाँ के पाप  हवन कर दूँ बोल दूँ, 'स्वाहा! कुछ शब्द दो तट पर जा अंजुरी-अंजुरी चढ़ाऊँ फिर से  स्वच्छ/निर्मल कल-क...
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