बेचैन आत्मा
25.9.19
बिना चीनी की चाय
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बिना चीनी की चाय और प्रातः भ्रमण की आदत को देख, मेरे एक सहकर्मी ने मन ही मन मान लिया, मुझे मधुमेह है! एक दिन लंच में उसने मु...
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21.9.19
लोहे का घर-57
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पहले सुबह होती थी, शाम होती थी, अब लोहे के घर में, पूरी रात होती है। वे दिन, रोज वाले थे। ये रातें, साप्ताहिक हैं। बनारस से जौनपुर की तुलन...
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15.9.19
बारिश
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आज बादल घिर रहे हैं खूब बारिश हो रही है शाम तक सूखा था मौसम रात बारिश हो रही है। एक घर था हमारा गङ्गा किनारे, संकरी गलियाँ तल का कम...
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10.9.19
अधिकार और कर्तव्य
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सरकारी नौकरों को काम के बदले वेतन दिया जाता है लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं होते अधिकार ढूँढते हैं! जबकि उनके हिस्से की कानूनी वसीयत ...
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18.8.19
लोहे का घर-56
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पाण्डे जी का चप्पल ................................. जैसे सभी के पास होता है, ट्रेन में चढ़ने समय पाण्डे जी के पास भी एक जोड़ी चप्पल था।...
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लोहे का घर-55
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क्या मैं सही ट्रेन में बैठा हूँ? ................................. न जाने कौन टेसन उतरेगा, बनारस से चढ़ा, पैसिंजर ट्रेन के बाथरूम में...
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14.7.19
न बिकने वाले घोड़े
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वह अस्तबल नहीं, देश का जाना माना, एक प्राइवेट प्रशिक्षण संस्थान था जहाँ देश भर से घोड़े उच्च शिक्षा के लिए आते। संस्थान में कई घोड़े थे। माल...
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