बेचैन आत्मा

18.9.20

मदारी मुक्त बन्दर

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गंगा उफान पर है डूब चुकी हैं पंचगंगा घाट की सभी मढ़ियाँ नहीं जा सकते  एक घाट से दूसरे घाट तक श्रीमठ के पास सीढ़ियों पर बैठ जहाँ टकरा रही थीं ग...
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20.8.20

नुक़्ता

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नुक़्ता हिन्दी का आधुनिक चलन है। रामचंद्र शुक्ल और हज़ारीप्रसाद द्विवेदी जैसे आचार्य बग़ैर नुक़्ता लगाये अग्रणी विद्वान बन गये। लेकिन हिन्दी...
2.8.20

लोहे का घर

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वो धूप है कि खेत में आदमी, पँछी या जानवर कोई नज़र नहीं आ रहा। दूर झुग्गी में बेना डुलाती दादी और आम की छाँव में जुगाली करती भैंस दिखी ...
27.7.20

अँधेरा

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लाइट चली गई है। मैं अँधरे में हूँ। ऐसा लगता है जैसे मैं ही अँधेरे में हूँ और सबके पास रोशनी है! पूरा शहर रोशनी से जगमगा रहा होगा! केवल मैं...
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25.7.20

बनारस में नागपंचमी

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छोटे गुरु का, बड़े गुरु का, नाग लो! भाई, नाग लो। नागपंचमी के दिन, इसी नारे के शोर से, हम बच्चों की नींद टूटती। ऊँघते, आँखें मलते, घर के बर...
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7.7.20

शुभ/अशुभ

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बिल्ली ने दो बच्चे दिए बारिश में भगा दिया था दिन में फिर आकर, रो रहे हैं रात में खाली नहीं है शायद किसी के घर/आँगन का कोई कोना आ ग...
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20.6.20

चीनियाँ बदाम

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वे पहले बहुत हँसमुख थे, अब मास्क मुख हो गए हैं। जब तक उनकी झील सी गहरी आँखों में न झाँको, पहचान में ही नहीं आते। बारिश में भीगते हुए, पुलि...
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