बेचैन आत्मा
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17.12.11
वृक्षों की बातें
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भोर की कड़ाकी ठंड में, घने कोहरे की मोटी चादर ओढ़े गहरी नींद सो रहे ‘ पीपल ’ की नींद, ‘ नीम ’ की सुगबुगाहट से अचकचा कर टूट गई। झुंझलाक...
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