बेचैन आत्मा
31.1.10
आयो रे बसंत चहुँ ओर.
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अपने शहर में, घने कोहरे और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच 'वसंत पंचमी' का त्यौहार कब आया और चला गया पता ही नहीं चला. हाँ, ब्लॉग जगत ...
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24.1.10
धूप, हवा और पानी
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तंग गलियों में नालियों के किनारे बसे एक कमरे वाले घरों में खटिये पर लेटे-लेटे आदतन समेटते रहते हैं वे बंद खिड़की के झरोखों ...
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17.1.10
जाड़े की धूप
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इस कविता का सृजन आज से 25 वर्ष पूर्व, सन 1985 में मकरसंक्रांति के दिन , एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को देखकर किया था. आज... जब मैं अप...
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10.1.10
आत्मा की बेचैनी और भूखा भेड़िया
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आत्मा की बेचैनीः- आज रविवार है, कविता पोस्ट करने का दिन । मैने रविवार को कविता पोस्ट करने का दिन इसलिए रखा कि यह छुट्टी का...
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3.1.10
प्रेम
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घने कोहरे और कंपा देने वाली ठंड से निकलकर मूंगफली और छिमी के दाने सा कीचन में पकते अम्मा के बगोने में पापा के प्यार सा अमर...
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27.12.09
कमरे की खिड़कियाँ खुली रखना......
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आज रविवार है, नववर्ष के पूर्व का अंतिम रविवार। सिगरेट के आखिरी कश सा प्यारा... अंतिम रविवार। मैं आज आप सभी को नववर्ष की बधाई देता हूँ। वर्ष...
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20.12.09
ये गहरी झील की नावें .......
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आज रविवार है, कविता पोस्ट करने का दिन। आलोचना के प्रस्ताव में आप सभी की प्रतिक्रिया बेहद रोचक रही। यह बात सच है कि बहुत से लोग मात्र कवि...
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