बेचैन आत्मा
31.8.10
दुश्मन.. !
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तड़पता है मेरे भीतर कोई मुझसा मचलता है बार-बार बच्चों की तरह जिद करता है हर उस बात के लिए जो मुझे अच्छी नहीं लगती। वह सफेद दाढ़ी वाले मौलाना...
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18.8.10
बच्चों ने बेचे गुब्बारे.....!
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मेला.. . हमने देखे गज़ब नज़ारे मेले में। लाए थे वो चाँद-सितारे ठेले में।। बिन्दी-टिकुली, चूड़ी-कंगना झूला-चरखी, सजनी-सजना जादू-सरकस, खेल-ख...
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13.8.10
आगे पंद्रह अगस्त कs लड़ाई हौ....... !
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एक दिन, एक गरीब / अनपढ़ रिक्शे वाले से बातचीत के दौरान मुझे अनुभव हुआ कि यह शख्स, १५ अगस्त का शाब्दिक अर्थ आजादी ही समझता है न यह कि इस दिन...
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8.8.10
आजादी के 63 साल बाद.....
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एक जनगणना मकान एक प्राचीन शहर। बेतरतीब विकसित एक मोहल्ले की गलियाँ। गलियों में एक मकान । मकान के दरवाजे पर कुण्डी खड़खड़ाता, देर से खड़ा...
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1.8.10
सावन की बरसात
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बादल-बिजली गड़गड़-कड़कड़ चमके सारी रात। टिप्-टिप्-टिप्-टिप्, टिप्-टिप्-टिप्-टिप् सावन की बरसात।। खिड़की कुण्डी खड़ख़ड़-खड़खड़ सन...
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25.7.10
सरकारी अनुदान
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झिंगुरों से पूछते, खेत के मेंढक बिजली कड़की बादल गरजे बरसात हुयी हमने देखा तुमने देखा सबने देखा मगर जो दिखना चाहिए वही न...
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18.7.10
एक अभागी सड़क
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धकधक पुर से व्यस्त चौराहा होते हुए शहर तक जाने वाली अभागी सड़क तू ही बता तू कहाँ से आई है ? मैं कोई सरकस का बाजीगर तो नहीं जो मौत के ...
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