बेचैन आत्मा

29.5.11

कुर्सी दौड़

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स्कूल में खेलते थे कुर्सी दौड़ बच्चों की संख्या से कम रहती थी हमेशा एक कुर्सी घंटी बजते ही गोल-गोल दौड़ते थे कुर्सी के इर्द-गिर्द बच्चे...
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25.5.11

भड़भूजा

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आर. टी. ओ. दफ्तर के आगे है दुकान भड़भूजा बुढ्ढा- बुढ़्ढी जिसके मालिक और न कोई दूजा। बुढ्ढा लाता चना-चबेना बुढ़िया सूखे पत्ते देखा कर...
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21.5.11

सबकी जड़ आप हैं !

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दुखी पिता ने अपनी बेटियों को सुनाकर नए पड़ोसी से कहा.. मेरी तीन पुत्रियाँ हैं तीनो के नाम सुनकर आपको होगी हैरानी एक आफत दूसरी विपत ...
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14.5.11

दूर देश का शिकारी

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दूर देश का शिकारी घुस गया एक दिन जहरीले सर्पों के देश बदलकर भेष एक बड़े विषधर को मार चीखने लगा.. मैने उसे मार दिया जिसने मुझे काटा था ! सर्प...
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7.5.11

पंछी प्रश्न

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आधियों ने गिराये किचन गार्डेन में लगे अकेले आम के वृक्ष से ढेर सारे टिकोरे मैने हंसकर कहा... कुदरती खेल। चिड़ियाँ कुतर रही हैं पक...
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30.4.11

डांटता है मकान मालिक...!

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मैने जिस घर में आश्रय पाया उसे अपना समझ लिया  किराया कोई और देता, मजा मैं लेता मैला मैं करता रंग-रोगन कोई और कराता चोट मैं पहुँचाता म...
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28.4.11

कविताई...!

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क्वचिदन्यतोअपि   से लौटकर........ जेहके देखा वही करत हौ अब कवियन पर चोट व्यंग्यकार, आलोचक के अब ना देबे हम वोट कमेंट कवियन पर होई! ज्ञ...
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