बेचैन आत्मा

5.2.16

लोहे के घर से-10

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January 27 at 5:53pm  ·  आज सभी  ‪#‎ ट्रेनें‬  दगा दे गईं। अपनी भी, पराई भी। हे प्रभु! ये हो क्या रहा है!!! 49अप और...
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31.1.16

लोहे के घर से-9

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January 11 ·  आज फिफ्टी डाउन कैंसिल है और किसान लेट।  ‪#‎ ट्रेन‬  के पड़ाव तक जाने का मन ही नहीं किया। बस स्टेशन से बस...
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17.1.16

बसंत की याद में

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ठंडी और बसंत की मिट्ठी नहीं होती है लौट-लौट आती है लौट-लौट जाती है गंगा के लहरों में बसंत की कोई चिट्ठी नहीं होती है वही साइबेरि...
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10.1.16

लोहे का घर -8

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‎ ट्रेन‬  आज राइट टाइम है। रोज के यात्रियों में खुशी की लहर है। खिले-खिले मुखड़े चिड़ियों की तरह चहक रहे हैं। सरसों के फूल रोज से अच्छे लग रहे...
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