बेचैन आत्मा

19.2.19

वीर रस क कविता

›
सब लिखेन वीर रस क कविता हमहूँ सोचे लिख ही दें  वीर रस क कविता सबसे पहिले आपन वीरत्व के जगाई कलम में तबे न कुछ धार देखाई?...
8 comments:
4.2.19

महापुरुष

›
इसमें कोई शक नहीं कि पुरुष अपने कर्मों से महान बनता है। पुरुष से महापुरुष बनने के लिए उसे कई सत्कर्म करने पड़ते हैं। महापुरुष बनने के लिए प...
8 comments:
26.1.19

बसंत

›
ठंड की चादर ओढ़ दाहिने हाथ की अनामिका में अदृश्य हो जाने वाले राजकुमार की जादुई अंगूठी पहन कर चुपके से धरती पर आता है बसंत तुमको भला ...
6 comments:
21.1.19

खिचड़ी

›
हमारे देश मे दरवाजा बंद करना कभी सुहागरात की निशानी होती थी, अब स्वच्छता अभियान की पहचान है। इसके लिए आदरणीय अमित सर और दूरदर्शन के शुक्...
3 comments:
13.1.19

ये पतंगें

›
तेरी नीयत तेरे मंझे तू ही जाने मैं साथ रहना चाहता हूँ इन पतंगों के! ये पतंगें बादलों में धूप लिखना चाहती हैं। आकाश में छाई है ब...
10 comments:
31.12.18

इक्कीसवीं सदी का टीन एज

›
अफसोस मत कर इक्कीसवीं सदी अभी अपने टीन एज के आखिरी साल में प्रवेश कर रही है और हम पचपन पार हो गए! अफसोस मत कर चाँद पर घर बनाने और...
6 comments:
30.12.18

जाड़े की धूप

›
आज मैंने भी तुमसे खूब प्यार किया आज तुमने भी मेरा खूब साथ दिया। छत पर चढ़ा तो झट से लिपट गई मुझसे थोड़ा ठहरा तो जी भर के मुझे गर्म किया। ...
1 comment:
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.