बेचैन आत्मा
28.5.20
लोहे का घर 60
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लोहे के घर की खिड़की से बगुलों को भैंस की पीठ पर बैठ कथा बाँचते देखा। धूप में धरती को गोल-गोल नाचते देखा। घर में लोग बातें कर रहे थे...
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24.5.20
बच्चे
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रोटी पर बैठकर उड़े थे कोरोना खा गया रोटी पैदल हो गए सभी बच्चे तलाश थी ट्रेन की, बस की कुचले गए पटरी पर, सड़क पर हम धृतराष्ट्र की ...
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20.5.20
बह रही उल्टी नदी.....
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तुम नदी की धार के संग हो रहे थे फेंककर पतवार भी तुम सो रहे थे। बह रही उल्टी नदी, अब क्या करोगे? क्या नदी के धार में तुम फिर बहोगे?...
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18.5.20
दृष्टि
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हम सभी को मिली है दृष्टि संजय की! देख सकते हैं दशा कुरुक्षेत्र की। धृतराष्ट्र बन पूछते कितने मरे? आज तक घायल हुए कितने बताओ? चल र...
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14.5.20
कविता सुनाने का नशा
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एक बनारसी कवि ने दो बनारसी कवियों का एक मजेदार किंतु सत्य किस्सा सुनाया। जिसे मैं अपने शब्दों में प्रस्तुत कर रहा हूँ। दोनो कवि मुफलिसी मे...
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12.5.20
खुश रहिए, मस्त रहिए
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हँसाना पहले भी आसान नहीं हुआ करता था फिर भी लोग हँसते थे, हँसाते थे। अब तो और भी कठिन हो गया है दिन ब दिन बढ़ती जा रही है दुखियारों...
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11.5.20
मन बेचैन
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मध्य रात्रि का समय है जारी है बारिश की टिप-टिप सावन भादों की नहीं जेठ की बारिश है अभी तीन दिन पहले ही थी वैशाख पूर्णिमा। रात को आँध...
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