बेचैन आत्मा

20.6.20

चीनियाँ बदाम

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वे पहले बहुत हँसमुख थे, अब मास्क मुख हो गए हैं। जब तक उनकी झील सी गहरी आँखों में न झाँको, पहचान में ही नहीं आते। बारिश में भीगते हुए, पुलि...
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14.6.20

जब भी मिलता है सम्मान...

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जब भी मिलता है सम्मान कहता भीतर का इंसान तूने रूप बनाया है! तूने झूठ सुनाया है! दिल में खंजर रख कर सबको गले लगाया है। जब भी मिलत...
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28.5.20

लोहे का घर 60

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लोहे के घर की खिड़की से बगुलों को भैंस की पीठ पर बैठ कथा बाँचते देखा। धूप में धरती को गोल-गोल नाचते देखा। घर में लोग बातें कर रहे थे...
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24.5.20

बच्चे

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रोटी पर बैठकर उड़े थे कोरोना खा गया रोटी पैदल हो गए सभी बच्चे तलाश थी ट्रेन की, बस की कुचले गए पटरी पर, सड़क पर हम धृतराष्ट्र की ...
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20.5.20

बह रही उल्टी नदी.....

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तुम नदी की धार के संग हो रहे थे फेंककर पतवार भी तुम सो रहे थे। बह रही उल्टी नदी, अब क्या करोगे? क्या नदी के धार में   तुम फिर बहोगे?...
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18.5.20

दृष्टि

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हम सभी को मिली है दृष्टि संजय की! देख सकते हैं दशा कुरुक्षेत्र की। धृतराष्ट्र बन पूछते कितने मरे? आज तक घायल हुए कितने बताओ? चल र...
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14.5.20

कविता सुनाने का नशा

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एक बनारसी कवि ने दो बनारसी कवियों का एक मजेदार किंतु सत्य किस्सा सुनाया। जिसे मैं अपने शब्दों में प्रस्तुत कर रहा हूँ। दोनो कवि मुफलिसी मे...
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