बेचैन आत्मा

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9.4.16

नव वर्ष

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अशोक, आम, नीम, पीपल.... सभी ने पहन लिए हैं  नये वस्त्र सूर्य देव से बनवाये सोने के गहने पहन झूम रही हैं गेहूँ की बालियाँ गूँज रहे हैं पं...
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30.3.14

नवसंवत्सर

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पत्ते झड़ते झर झर झर मन करे उड़ूँ  फर फर फर पूजा की थाली डगर-डगर क्या तेरा घर क्या मेरा घर नवसंवत्सर ! नवसंवत्सर ! ...
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