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9.4.16

नव वर्ष

अशोक, आम, नीम, पीपल....
सभी ने पहन लिए हैं 
नये वस्त्र
सूर्य देव से बनवाये
सोने के गहने पहन
झूम रही हैं
गेहूँ की बालियाँ
गूँज रहे हैं
पंछियों के कलरव
डाल पर
आ गये हैं टिकोरे
दमक रहे हैं
गुड़हल के फूल
लटक रहे हैं
नीबू
टप-टप टपक रहे हैं
महुए
घर-घर
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: के स्वर
गली-गली, मंदिर-मंदिर, सुन्दर श्रृंगार
डगर-डगर
पूजा की थाली
लगता है आ गया
हमारा प्यारा नव वर्ष
ढेर सारी बधाइयाँ
हार्दिक शुभकामनाएँ.

30.3.14

नवसंवत्सर


पत्ते झड़ते
झर झर झर
मन करे उड़ूँ 
फर फर फर
पूजा की थाली
डगर-डगर
क्या तेरा घर
क्या मेरा घर
नवसंवत्सर! नवसंवत्सर!

सोने-सी बाली
गेहूँ की
रक्तिम आभा है
गुड़हल की
समृद्ध धरा
हर्षित अम्बर
नवसंवत्सर! नवसंवत्सर!

कोहरे का सपना चूर हुआ
अंधकार अब दूर हुआ
चैत्र शुक्ल की प्रतिप्रदा
हँस कर निकल रहे दिनकर
दूज का चाँद तैयारा खड़ा
स्वागत करने को जमकर
नवदुर्गा का आह्वान
जय घोष कर रहा गगन
यह सृष्टि का प्रथम दिवस
विक्रमादित्य का विजय समर
मन क्यों न खुशी से पागल हो !
झूमे, नाचे, हर हर हर
नवसंवत्सर! नवसंवत्सर!


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आप सभी को गुड़ी पड़वा और नवसंवत्सर की पूर्व संध्या पर ढेर सारी शुभकामनाएँ, हार्दिक बधाई। नववर्ष मंगलमय हो।