बेचैन आत्मा

Showing posts with label पतंग. Show all posts
Showing posts with label पतंग. Show all posts
13.1.19

ये पतंगें

›
तेरी नीयत तेरे मंझे तू ही जाने मैं साथ रहना चाहता हूँ इन पतंगों के! ये पतंगें बादलों में धूप लिखना चाहती हैं। आकाश में छाई है ब...
10 comments:
15.1.12

बनारस की छत और पतंगबाजी

›
पतंग आवा राजा चला उड़ाई पतंग । एक कन्ना हम साधी एक कन्ना तू साधा पेंचा-पेंची लड़ी अक...
45 comments:
12.1.12

पतंग

›
कटे बांस के दो टुकड़ों संग बंधी हुई डोरी। मैं पतंग हूँ उड़ना चाहूँ उड़ा मुझे होरी।। अरे ! संभल के ठुमकी ठुमकी नील गगन...
53 comments:
›
Home
View web version
Powered by Blogger.