बेचैन आत्मा
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होली
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होली
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18.3.14
रंगों का इंद्रधनुष
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होली में बाबा देवर लागें। जैसे ही यह वाक्य कान में पड़ा मैं पूरी तरह ज़वान हो गया। जब बाबा देवर हो सकते हैं तो हम क्यों नहीं? हम तो अभी ...
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22.2.14
गाँव
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एक गाँव है जहाँ सभी की खाट खड़ी है इक कुआँ है जिसमें चउचक भांग पड़ी है कोई बांट रहा है लड्डू कोई खील-बतासे और जगत पर ड...
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10.2.14
दिल धक-धक करने लगा...
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इस मौसम में माधुरी दीक्षित की याद आ रही है और याद आ रहा है उनका गाया सुपर हिट गीत—दिल धक-धक करने लगा...। मैने घर - बाहर टटोला तो पाया...
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28.3.13
कहाँ गई होली...!
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बसंत आया सरसों के फूल खिले गेहूँ की बालियाँ लहलहाईं झूमने लगे अरहर सूखी सनाठी को पकड़कर इक-दूजे से लिपटने लगीं लताएँ धरती माँ न...
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18.8.12
काहे हउआ हक्का-बक्का..!
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काहे हउआ हक्का-बक्का ! छाना राजा भांग - मुनक्का ! काहे चीखत हउवा चौचक अरबों-खरबों क s घोटाला ! चिन्नी चोर गली - गली में केहू...
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18.3.11
आउट...! नॉट आउट...!
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आज ऑफिस से घर लौटते वक्त दोस्तों ने छनाई है भांग कहते थे भांग छान कर जब लिखबा तs लिखबा ऊँची चीज ! पिलाना चाहते थे दारू भी पर भाग आया...
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