बेचैन आत्मा
2.1.12
घर
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बड़े शहर में सहमा सहमा एक बड़ा खंडहर रहता है एक कमरा है उस कमरे में प्यारा सा इक घर रहता है। पति देव बड़े कर्मठी ...
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1.1.12
आग लगे ब्लॉगिंग तोहार....!
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12 तक 11 था अगले ही पल 12 था अब 12 कहे तेरा करूँ दिन गिन गिन के इंतजार आजा प्यारे 13 हमार। रतिया जगाये कम्पूटर हमें ...
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31.12.11
12 तक 11 होगा
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12 तक 11 होगा अगले पल फिर 12 होगा एक लाभ तो हुआ सुनिश्चित 11 से अब 12 होगा बड़े लोग हैं बड़े दिवाने रात रात भर दुआ करे...
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लोकपाल की याद में.....
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अस्सी में...पप्पू की अड़ी पर बैठा था। लोकपाल बिल पर बड़ी गरमा गरम बहस के बीच मैने कहा.. "खौला चकाचक गुनगुना हो गया है, भारी गदा था झ...
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23.12.11
दुश्मन कहीं का..!
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सुबह ने कहा .. बहुत ठंड है, सो जाओ। दिमाग ने कहा … उठो ! ऑफिस जाओ !! धूप ने कहा .. यूँ उंगलियाँ न रगड़ो आओ ! म...
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17.12.11
वृक्षों की बातें
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भोर की कड़ाकी ठंड में, घने कोहरे की मोटी चादर ओढ़े गहरी नींद सो रहे ‘ पीपल ’ की नींद, ‘ नीम ’ की सुगबुगाहट से अचकचा कर टूट गई। झुंझलाक...
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11.12.11
ओ दिसंबर !
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ओ दिसंबर ! जब से तुम आये हो नये वर्ष की, नई जनवरी मेरे दिल में उतर रही है। ठंडी आई शाल ओढ़कर कोहरा आया पलकों पर छि...
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