बेचैन आत्मा

8.2.21

शत्रुता

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मैने मांगा,  जाड़े की धूप उसने दिया, घना कोहरा! मैने पूछा, "ठंडी कब जाएगी?" उसने कहा, "थोड़ी बर्फवारी होने दो।" मैने पूछा,...
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गुलाब

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क्या तुम्हें याद है? पहली बार गुलाब पकड़ते वक्त परस्पर छू गई थीं हमारी उँगलियाँ तब क्या हुआ था? मुझे तो याद है.. गुलाब और गुलाबी हो गया था! क...
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25.1.21

वसंत

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यूं ही नहीं आता वसंत लड़नी होती है, लंबी लड़ाई धूप को कोहरे के साथ। लगने लगता है हार गया कोहरा तभी नहीं दिखती धूप लगने लगता है गई ठंडी छाने ल...
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21.12.20

मन बहुत बेचैन मेरा

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 मन बहुत बेचैन मेरा तू मिले तो चैन आए। तू धरा में तू गगन में जर्रे-जर्रे में छुपा तू है पढ़ा हमने भी लेकिन वही दिन औ रैन आए! मन बहुत बेचैन मे...
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17.12.20

चालाक चिड़ियाँ

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एक चिड़िया नींबू की डाली से उतर मुंडेर के प्याले पर बैठ गई इधर-उधर मुंडी हिलाई, पूँछ उठाई फिर गड़ा दिए चोंच प्याले में और.. उड़ गई। हाय! प्याले...
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20.10.20

हमारा कुछ न बिगड़ेगा

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धीरे-धीरे कम हो रहा था नदी का पानी नदी में डूब कर गोता लगाने वाले हों या  एक अंजुरी पानी निकाल कर तृप्त हो जाने वाले, सभी परेशान थे.. बहुत क...
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12.10.20

मुझे आकाश चाहिए

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तुम हवा, जल और धरती का प्रलोभन देते हो इन पर तो मेरा  जन्मसिद्ध अधिकार है! तुमने सजा रखे हैं  रंग बिरंगे पिजड़े और चाहते हो दाना-पानी के बदले...
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