Showing posts with label वणिकोपदेश. Show all posts
Showing posts with label वणिकोपदेश. Show all posts

18.9.09

वणिकोपदेश

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
जरूरत से ज्यादा कहीं जल न जाए।

मुद्रा पे हरदम बको ध्यान रखना
करो काग चेष्टा कि कैसे कमायें
बनो अल्पहारी रहे श्वान निंद्रा
फितरत यही हो कि कैसे बचाएं

पूजा करो पर रहे ध्यान इतना
दुकनियाँ से ग्राहक कहीं टल न जाए।

दिखो सत्यवादी रहो मिथ्याचारी
प्रतिष्ठा उन्हीं की जो हैं भ्रष्टाचारी
'लल्लू' कहेगा तुम्हे यह ज़माना
जो कलियुग में रक्खोगे ईमानदारी।

मिलावट करो पर रहे ध्यान इतना
खाते ही कोई कहीं मर न जाए।

नेता से सीखो मुखौटे पहनना
गिरगिट से सीखो सदा रंग बदलना
पंडित के उपदेश सुनते ही क्यों हो
ज्ञानी मनुज से सदा बच के रहना।

करो पाप लेकिन घडा भी बड़ा हो
मरने से पहले कहीं भर न जाए।