अब
खुशी नहीं होती
जब
तेज रफ़्तार से चलती है ट्रेन
डर लगता है
एक पुल
आया था अभी
थरथराया वो
और..
डर गया
लोहे का घर!
सुनी थी चीखें
इसके यात्रियों ने
कल देर रात तक
टी.वी. पर
दिखाये थे रिपोर्टर ने
एक के ऊपर एक
चढ़ी हुई बोगियाँ
हस्पताल जाते
घायल यात्री
जमा किये गये
लावारिश झोले,
शादी के कार्ड,
दुल्हन के हार,
और भी बहुत कुछ...
कलेजा मुँह को आ जाता
जब बजते
झोले में रखे मोबाइल!
आह!
आज सुबह
ढूँढ रहे थे हम
अखबार के पन्नों पर
अपनों के शव
ली थी न संतोष की सांस ?
मगर
फूट-फूट कर रोये होंगे वे
पूरी हुई होगी
जिनकी खोज
मुआवजा!
नहीं दे पाओगे सरकार!!!
कुछ जख्म ऐसे होते हैं
जो मरने के बाद ही जाते हैं
अब तो
समझ में आ गया होगा न ?
गाड़ी पटरी पर चलाना
हँसी-खेल नहीं
दंभ मत करो !
गंदे
शहर ही नहीं,
मैली
नदी ही नहीं,
जाली
नोट ही नहीं,
जर्जर है
पूरी की पूरी
व्यवस्था.
................
खुशी नहीं होती
जब
तेज रफ़्तार से चलती है ट्रेन
डर लगता है
एक पुल
आया था अभी
थरथराया वो
और..
डर गया
लोहे का घर!
सुनी थी चीखें
इसके यात्रियों ने
कल देर रात तक
टी.वी. पर
दिखाये थे रिपोर्टर ने
एक के ऊपर एक
चढ़ी हुई बोगियाँ
हस्पताल जाते
घायल यात्री
जमा किये गये
लावारिश झोले,
शादी के कार्ड,
दुल्हन के हार,
और भी बहुत कुछ...
कलेजा मुँह को आ जाता
जब बजते
झोले में रखे मोबाइल!
आह!
आज सुबह
ढूँढ रहे थे हम
अखबार के पन्नों पर
अपनों के शव
ली थी न संतोष की सांस ?
मगर
फूट-फूट कर रोये होंगे वे
पूरी हुई होगी
जिनकी खोज
मुआवजा!
नहीं दे पाओगे सरकार!!!
कुछ जख्म ऐसे होते हैं
जो मरने के बाद ही जाते हैं
अब तो
समझ में आ गया होगा न ?
गाड़ी पटरी पर चलाना
हँसी-खेल नहीं
दंभ मत करो !
गंदे
शहर ही नहीं,
मैली
नदी ही नहीं,
जाली
नोट ही नहीं,
जर्जर है
पूरी की पूरी
व्यवस्था.
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