1.10.12

आज की सुबह



सामने सूरज नहीं है, पूनम का चाँद है। थककर सोने जा रहा है। 


सूरज तो यहाँ है। इन गायों के पीछे।


खेत में जाते-जाते गुर्राने लगा।


नहाता भी है। नदी, तालाब जो भी मिले।


23 comments:

  1. ऐ जाते हुए चाँद,ज़रा मुस्करा के देख,
    कोई और भी तुम्हारे साथ डूब रहा है !

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  2. चल उठ अभिसार का वक्त ख़त्म हुआ !

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    1. कैमरा उठा फोटो खींच सेहत बना :)

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    2. बलॉग में डाल! यह क्यों छोड़ दिया?:)

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  3. लगता है आसमान में सूरज का पेड़ है, रोज़ एक निकल आता है ,
    दिन भर आँखें दिखाता ,डोलता ,शाम पड़े समुंदर में डूब जाता है !

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  4. नारी-गौतम को छला, छले आज भी सोम ।

    राह दिखाना ढोंग है, ताके पूरा व्योम ।
    ताके पूरा व्योम, डरे नहिं राहु-केतु से ।

    प्रणय-कक्ष में झाँक, रहा वह नित्य सेतु से ।

    रविकर आओ शीघ्र, भगाओ तम-व्यभिचारी ।

    यह पापी निर्लज्ज, आज भी ताके नारी ।।

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  5. omnipresent ...सर्वव्याप्त ...चाँद की उस आभ मे भी वो ही है ....!!

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  6. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  7. वाह ...अनुपम प्रस्‍तुति।

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  8. वाह... गज़ब के फोटोग्राफ्स....

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  9. इतनी साफ सुथरी और चौड़ी सड़क बनारस में ? अशोका होटल के सामने वाली सड़क है का?

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    1. काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सड़क है। खेत भी वहीं का कृषि विभाग है। गायें भी वहीं की हैं।

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    2. अगर कोई वहां का नहीं है तो वो हैं कैमरामैन :)

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  10. बस एक शब्द ....अतिसुन्दर.

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  11. वाह ! खूबसूरत! आपके बहाने हम भी नज़ारा कर लेते हैं.

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  12. ज़ेहन खूबसूरत नज़र खूबसूरत और तो और अंगुली के इशारे पे नाचती नहाती कुदरत ;-)

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    1. यहाँ फेसबुक वाले लाइक की कमी खल रही है। आपका कमेंट लाइक किया।:)

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  13. वाह, अति सुन्दर!

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  14. सुन्दर है जी! अतिसुन्दर भी!

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  15. बहुत खूबसूरत चित्र !

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