बड़े भले लगते हैं
जब करते हैं
हमारे लिए
संघर्ष
दे रहे होते हैं
आश्वासन
बड़े बुरे लगते हैं
जब बैठे होते हैं
कुर्सी पर
दीन हीन लगते हैं
खटखटाते हैं
दरवाजा
मांगते हैं
वोट
राक्षस लगते हैं
जब चलवाते हैं डंडे
करते हैं अत्याचार
सभी जानते हैं
गिरगिट की तरह
बदलते हैं रंग
लगाते हैं
मुखौटे
समय-समय पर
बेनकाब भी हुए हैं
रावणी चेहरे
मगर अफसोस
जितने गहरे होते हैं
जिंदगी के जख्म
उतनी कमजोर होती है
जनता की याददाश्त।
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सुबह तक विश्व पर्यावरण की चिंता कर रहा था मगर क्या पता था कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का पर्यावरण ही पूरी तरह बिगड़ चुका है !