ये आज सुबह की तस्वीरें हैं। गंगा जी में आजकल साइबेरियन पंछियों का जमावड़ा है। नाव में सूर्योदय के दर्शन के लिए घूमने वाले यात्रि इनके लिए कुछ दाना लिये रहते हैं। आओ-आओ की पुकार लगाते हैं। ये पंछी आवाज को पहचानने लगे हैं या दाने को ये तो वे ही जाने लेकिन सूर्योदय के समय इनको नावों के पीछे-पीछे भागते देखना बड़ा अच्छा लगता है।
यहाँ घाट पर वृक्ष नहीं हैं। दशाश्वमेध घाट के पास गमलों में पौधे लगे हैं।
यह फोटोग्राफी का चातुर्य प्रदर्शन है। ऐसा कोई किला नहीं है घाट में।
बनारस में गंगा भक्ति, शिव भक्ति कोई अचरज की बात नहीं है लेकिन इस बनारसी भक्त को देखिये। ये स्नान-ध्यान के पश्चात गंगा घाट की मिट्टी से ताजे शिवलिंग की स्थापना करने के बाद सूर्योदय के समय शिव को गंगाजल चढ़ा रहे हैं! बनारस और सुबहे बनारस को आत्मसात करने के लिए समय देना होता है। तुलसी, कबीर ने यूँ ही नहीं इसे अपने हृदय में बसाया होगा!