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2.10.23

बन्दर

भटकना नहीं चाहते वन-वन,

सीधे पहुंचना चाहते हैं

संकट मोचन!


सभी बन्दर

नहीं खा पाते, 

चने और देसी घी के लडडू।

अधिकांश तो

रोटी के लिए

मारे-मारे फिरते हैं

छत-छत, टेशन-टेशन

घुड़की देते हैं,

छिनैती करते हैं,

पकड़े गए तो

नाचते भी हैं

मदारी के इशारे पर।


इन्हें देख,

यकीन नहीं होता

तनिक भी सोचते होंगे

बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो।


हमको तो नहीं दिखते

देश के लिए मिटने वाले 

गाँधी जी के तीन बंदर

हमको तो सभी

संकटमोचन जाते दिखते हैं!


तीनों बंदर

अपना दुखड़ा रोने

कहीं राजघाट तो नहीं चले गए

बापू के पास!!!🤔

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18.9.20

मदारी मुक्त बन्दर

गंगा उफान पर है

डूब चुकी हैं पंचगंगा घाट की सभी मढ़ियाँ

नहीं जा सकते 

एक घाट से दूसरे घाट तक

श्रीमठ के पास

सीढ़ियों पर बैठ

जहाँ टकरा रही थीं

गंगा की लहरें

कई लोग एक साथ कर रहे थे

पितरों को तर्पण

मन्त्र पढ़ रहा था, ऊपर बैठा पण्डा

बीच-बीच में निर्देश देता..

जनेऊ

गले में माला कर लीजिए,

अपसव्य होइए!

जनेऊ

बाएँ कन्धे पर,

सव्य होइए!

जनेऊ दाएँ कन्धे पर,

राजघाट पुल की ओर अर्घ्य दीजिए,

रामनगर की ओर अर्घ्य दीजिए,

अपना गोत्र बोलिए,

पितरों को याद कीजिए....


मैं भी गया था

तर्पण देने

ढूँढ रहा था 

अपने पण्डित जी को

मुझसे पहले

पण्डित जी ने मुझे देख लिया

हाथों से इशारा किया..

वहाँ बैठिए जजमान,

गंगा स्नान कीजिए,

अर्घ्य दीजिए.....


तभी एक बंदर

किसी की पोटली से

एक आलू निकालकर भागा

पण्डे ने डांटा

मगर यह वाला बन्दर

मदारी मुक्त था, स्वतन्त्र था

आलू मुँह में दबाए

चढ़ता चला गया

घाट की सीढ़ियां!

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