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14.12.18

ओ दिसम्बर! (4)

ओ दिसम्बर!
जब से तू आया है 
सुरुज नारायण
बड़ी देर से
निकल रहे हैं,
बिस्तर में ही 
आ जाती है
अदरक वाली चाय।

घर से निकलो
चौरस्ते पर, रस्ता रोके
हलवाई की
गरम कड़ाही!

सुबह-सबेरे
छन छन छन छन
नाच रही है
फुली कचौड़ी
औ शीरे में
मार के डुबकी
निकल रही है
लाल जलेबी

लोहे के घर में बैठो तो
रस्ते-रस्ते
सरसों के फूल बिछे हैं
अन्तरिक्ष के यात्री जैसे
सभी पुराने 
यार दिखे हैं!

घर लौटो तो
खुशबू-खुशबू
महका-महका
आँगन मिलता,
रात की रानी
दरवज्जे पर ही
बड़े प्यार से
हाय!
बोलती।

ओ दिसम्बर!
जब से तू आया है
नीम अँधेरे
एक पियाली
चुपके-चुपके
छलक रही है,
मेरे दिल में
नए वर्ष की, नई जनवरी
उतर रही है।
.... 

9.4.16

नव वर्ष

अशोक, आम, नीम, पीपल....
सभी ने पहन लिए हैं 
नये वस्त्र
सूर्य देव से बनवाये
सोने के गहने पहन
झूम रही हैं
गेहूँ की बालियाँ
गूँज रहे हैं
पंछियों के कलरव
डाल पर
आ गये हैं टिकोरे
दमक रहे हैं
गुड़हल के फूल
लटक रहे हैं
नीबू
टप-टप टपक रहे हैं
महुए
घर-घर
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: के स्वर
गली-गली, मंदिर-मंदिर, सुन्दर श्रृंगार
डगर-डगर
पूजा की थाली
लगता है आ गया
हमारा प्यारा नव वर्ष
ढेर सारी बधाइयाँ
हार्दिक शुभकामनाएँ.

1.1.12

आग लगे ब्लॉगिंग तोहार....!



12 तक 11 था
अगले ही पल 12 था
अब 12 कहे
तेरा करूँ
दिन गिन गिन के
इंतजार
आजा प्यारे
13 हमार।

रतिया जगाये कम्पूटर हमें
भिनसहरे उठाये मोबाइल हमें
बाहर जो निकला कि घूमूं जरा
बारिष ने चौचक भिगोया हमें

सूरज दिखा ना नये साल का
समझा ना मतबल इस बवाल का
सोचा चलो अब ब्लॉगिंग करें
स्वागत करें हम नये साल का

14 भी आयेगा
15 भी आयेगा
16 भी आयेगा
एक दिन वो आयेगा
रहोगे ना तुम
और रहेंगे ना हम
दुनियाँ से मिटेगा
कभी भी ना गम
कहेंगे सभी पर चूकेंगे ना

तेरा करूँ
दिन गिन गिन के
इंतजार
आजा प्यारे
फलाने हमार।


................................


नये साल में बूंदा-बांदी
काटो राजा घर में चाँदी
बीबी प्यार करेगी चौचक
छोड़ो गर ब्लागिंग का चक्कर
वह तो कहती कई जनम से
तेरा करूँ....

तेरा करूँ
दिन गिन गिन के
इंतजार
आग लगे ब्लॉगिंग
तोहार।

..............................

नमस्कार !
नये साल में मिले सभी को
प्रिय का
भरपूर प्यार
आप पहिले दिन हमको पढ़े
इसके लिए
ढेर सारा आभार
आयेंगे आपके ब्लॉग पर भी
बाहर बरसात हो रही है
अउर दफ्तर में छुट्टी है
कितना करेंगे
बीबी से प्यार !
नमस्कार।
..................................

31.12.11

12 तक 11 होगा



12 तक 11 होगा 
अगले  पल फिर 12 होगा
एक लाभ तो  हुआ सुनिश्चित 
11 से अब 12 होगा

बड़े लोग हैं बड़े दिवाने 
रात रात भर दुआ करेंगे
इक दूजे को बड़े प्यार से
देखेंगे और छुआ करेंगे

बजा-बजा कर बम पटाखा
रात रात भर धुआँ करेंगे
दुःख देंगे धरती माता को
हमको भी सोने ना देंगे 

लगता है 
सबका सारा गम 
अब तो नौ दो ग्यारह होगा
नई सुबह की पौ फटते ही
पौ सबका अब 
बारह होगा

ले लो-ले लो 
मेरी बधाई
नींद आ गई 
सो जायेंगे
अंधियारे जो माल कटेगा
धर देना
उठकर खायेंगे

एक लाभ के स्वप्न लोक में
घूमो यारों 
तभी मजा है
एक बरष की उम्र कम हुई
सोचोगे तो 
क्या पाओगे।

.......................................

नव वर्ष मंगलमय हो।