हम
नारे लगाते रहे..
'कर्मचारी एकता जिंदाबाद'
'इंकलाब जिंदाबाद'
'दुनियाँ के मजदूरों एक हो'
वे समझाते रहे...
तुम हिन्दू हो
मुस्लिम हो
अगड़े हो
पिछड़े हो
दलित हो
अतिदलित हो...।
हम चीखते..
हम मजदूर हैं!
वे कहते...
हां, हां,
हम तुम्हारे सेवक हैं!!!
उनमें
सेवक बनने
और सच्चा, सबसे अच्छा,
दिखने की होड़ लग गई
वे रोटी फेंकते
हम
खाने के साथ साथ
गिनते भी...
किसे अधिक मिला, किसे कम!
अब हम
सिर्फ मजदूर नहीं हैं
हिन्दू हैं
मुस्लिम हैं
अगड़े हैं
पिछड़े हैं
दलित हैं
अतिदलित हैं और
मजदूर एकता!
एक भद्दा मजाक है।
नारे लगाते रहे..
'कर्मचारी एकता जिंदाबाद'
'इंकलाब जिंदाबाद'
'दुनियाँ के मजदूरों एक हो'
वे समझाते रहे...
तुम हिन्दू हो
मुस्लिम हो
अगड़े हो
पिछड़े हो
दलित हो
अतिदलित हो...।
हम चीखते..
हम मजदूर हैं!
वे कहते...
हां, हां,
हम तुम्हारे सेवक हैं!!!
उनमें
सेवक बनने
और सच्चा, सबसे अच्छा,
दिखने की होड़ लग गई
वे रोटी फेंकते
हम
खाने के साथ साथ
गिनते भी...
किसे अधिक मिला, किसे कम!
अब हम
सिर्फ मजदूर नहीं हैं
हिन्दू हैं
मुस्लिम हैं
अगड़े हैं
पिछड़े हैं
दलित हैं
अतिदलित हैं और
मजदूर एकता!
एक भद्दा मजाक है।