14.2.10

भांग में बहुत मजा हौ



महाशिवरात्रि के दिन 'बाबा' का दर्शन कर लौट रहा था. सुबह से बारिश हो रही थी और पूरी तरह भींग चुका था. गोदौलिया चौराहे पर एक मित्र मिल गया. वह जानता था कि मैं कविता लिखता हूँ और शतरंज भी खेलता हूँ. वह मुझसे भांग और ठंडाई पीने का अनुरोध करने लगा. मैं घबड़ा गया. बोला, " यह तो संभव ही नहीं है. भांग मुझे सूट नहीं करता." वह नहीं माना, मुझे जबरदस्ती ठंडाई की दुकान पर ले गया. भांग खिलाई, ठंडाई पिलाया और जो कहा वह हू-ब-हू यहाँ लिख रहा हूँ. आशा है आपको मजा आयेगा, बनारस की मस्ती और काशिका बोली से रू-ब-रू होने का अवसर मिलेगा. प्रस्तुत है कविता - भांग में बहुत मजा हौ. आप चाहें तो भांग छानकर भी 'वेलेंटाइन' का मजा ले सकते हैं.


भांग में बहुत मजा हौ




भांग छान के जब लिखबा तs लिखबा ऊँची चीज

जबरी खिलाइब भांग रजा तू हौवा ऊँची चीज

सुतबा तs सुतले रह जइबा उठबा तs नचबा राजा

उड़बा नील गगन में जा के परियन से मिलबा राजा



भांग में बहुत मजा हौ.



खेलबा जब शतरंज तs चलबा घोड़ा साढ़े तीन

हार के पाकिस्तानी भगलन अब पटकाई चीन

तोहरे मन शहनाई बाजी भौजी के लागी बीन

देर रात तक खेलबा तs पटकाई खाली टीन



भांग में बहुत मजा हौ.



लइकन के महतारी तोड़ी तू उनके पुचकरबs

उठा के गोदी बहुत प्यार से उनसे जब ई पुछबs

केकर बेतवा हौवा बोला पापा क कि अम्मा कs

तोहार नाम केहू ना लेई बोलिहैं खाली अम्मा कs



भांग में बहुत मजा हौ. ..

33 comments:

  1. :)...........
    Rachana mazedar to ab honee hee thee.........

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  2. हा हा हा ! भांग में बहुत मज़ा है ।
    सही कहा है , भाई सही कहा है।

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  3. बाह ..... बहुत मज़ा है भांग मा ..... ऊ तो नज़र आ रहा बा तोहार ब्लॉग मा ......

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  4. bhaang.............
    asli mazaa khud ke paise se nahi balki maangi hui bhaang se aataa hain.
    hain naa, bhaang-maang kaa combination.
    haha ha haha
    thanks.
    www.chanderksoni.blogspot.com

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  5. अभी तक एक ही फ़िल्मी गीत सुन पाया था भंग का रंग जमा हो और पान खा लिया जाये तो जिगर मे झटका लगता है ,आज यह भी जाना कि घोडा साडे तीन घर भी चल सकता है यदि खिलाडी नशे मे हो -पैदल दो दो घर चल सकता है क्योंकि ""भांग घुटे तो ऐसी घुटे जैसे गाडो कीच ,घर के जानैं मर गये ,आप नशे के बीच "

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  6. अरे काहे ललचाये दे रहे हो थोडी भाग हमे भी भेज देते तो पता भी चलता कि क्या मजा है, वेसे हम ने आज तक भाग देखी भी नही, सुनी जरुर है, लेकिन आप की कविता मै भांग का नशा जरुर हो गया.
    धन्यवाद

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  7. लाजवाब! ठंडाई की बात ही निराली है.

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  8. का्शिका क अन्दाज बहुतै सुहावन हौ !
    भांग चढ़ गइले पर तऽ सच्चों ऊँची बात ही कहाई !

    शानदार । आभार ।

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  9. sachmuch bhang me bahut maja hai. mera bhi anubhav aapke jaisa hi hai. achhe kavi our lekhak k liye bhang oushadhi hai.

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  10. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  11. भांग के नशे के नाम से ही और सब नशा कोसों दूर भाग जाता है !

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  12. महादेव...महादेव!

    भागं खाय के बनारस क लन्दन ब्रीज देखला की ना गुरु।
    असली बनारस त भांग खाय के लउकयला।
    महादेव।

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  13. देवेन्द्र जी ,
    यहाँ पत्ते भी नायिका के ही बदन के थे ...जो उस आग से झुलस कर झड रहे थे .....!!

    और भांग का मजा एक बार लिया था ...पता है आसमां में उड़ कर कैसे राजकुमार नज़र आते हैं ....

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  14. खेलबा जब शतरंज तs चलबा घोड़ा साढ़े तीन

    हार के पाकिस्तानी भगलन अब पटकाई चीन

    तोहरे मन शहनाई बाजी भौजी के लागी बीन

    देर रात तक खेलबा तs पटकाई खाली टीन



    vaise to mujhe bhojpuri samajh mein kam hi aati lekin jitna bhi samajh mein aaya bahut achha laga.....

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  15. देवेन्दर जी मैं बहुत आभारी हूँ आपका तथा आपके सुझाव का भी , मेरी तस्वीरें भी ब्लॉग पर हों .... मैं जल्दी अमल करूंगा ! आपके ब्लॉग पर आ कर भंग का मज़ा तो लिया ही एक बहुत बेहतर कलमकार से मुलाक़ात भी हुई!बहुत सुंदर रचनाएँ हैं आपकी !बहुत बहुत आभार !

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  16. वाह! बहुत महीन घुटी है भांग!

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  17. महोदय धन्यवाद.
    रचना बहुत अच्छी लगी. आभार.

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  18. बहुत सुंदर रचनाएँ हैं।

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  19. वाह..लग रहा है एकदम भाँग के नशे में ही बन है यह कविता...बहुत बढ़िया मस्त बनारसी अंदाज...धमाकेदार कविता...

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  20. Pee aapne aur maze hamne bhi uthaye!

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  21. अरे जबरदस्त देवेन्द्र जी....जबरदस्त।

    हम तो मनाते हैं कि बीच बीच में यूं ही आपको कोई भंग पिलाता रहे और हम यूं ही मस्ती में सराबोर ऐसी रचना से रुबरु होते रहें।

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  22. bhang main maja hai? jai bhole baba ki

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  23. भाँग के नशे में सुंदर रचना करडाली
    आभार ...........

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  24. बहुत सुन्दर पोस्ट
    आभार ...........

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  25. का बात है भाई देवेन्द्र जी| ई त एहारो चढ़ ग‍इल।
    खेलबा जब शतरंज तs चलबा घोड़ा साढ़े तीन
    मजवै आ ग‍इल डाइरेक्ट। बहुत बढ़िया लगल!
    सब भोले के नगरी क कमाल हऽ
    सादर

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  26. गजबै -अभी से !

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  27. भांग का मजा दूना कर रही है ये उड़ते घोड़े की तस्वीर...
    सच कहा...]


    भांग में बहुत मजा है..

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  28. devendra jee
    hamare ghar jo bhee aata hai use VISHVAS jaroor padne ke liye prerit karatee hoo aua aap vishvas wale uncle ban gaye hai............:)

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