7.7.14

चींटी और पहाड़


चींटियों को
घर-आँगन
अन्नकण मुँह में दबाये
पंक्तिबद्ध हो
आते-जाते ही देखा है न?

तपती रेत में
अपने सर पर पहाड़ लादे
दिशा हीन
इधर-उधर भागते तो नहीं देखा ?

कल देखा तो एकदम से डर गया!
चीखने लगा...

रूको!
मूर्ख चींटियों
पेट
चीनी के एक दाने से भी छोटा
और सर पर लादे भाग रही हो पहाड़!!!

मेरी चीख से
लड़खड़ा गये
एक चींटी के कदम
सर से गिरकर
लुढ़कने लगा पहाड़
पहाड़ के साथ खाई में गिरकर
मर गया
एक हाथी का बच्चा
बच्चे के मरते ही
हवा से बातें करने लगा
पागल हाथियों का झुण्ड।

चींटी ने मुझे
डांटते हुए कहा....

मूर्ख !
क्या मैं इतना भी नहीं जानती
कि मेरा पेट
चीनी के एक दाने के बराबर है ?
पहाड़ ढोती हूँ तो क्या खा सकती हूँ पूरा ?

एक अन्नकण के लिए
पहाड़ ढोना
मेरी नीयति है
पेट से अधिक
कौन खा पाता है भला?

मैं समझ नहीं पाया
बोलते-बोलते चींटी बड़ी होती जा रही थी
या मैं
चींटी की तरह छोटा !

.......................

16 comments:

  1. आजकल की दुनियाँ में बहुतों के साथ यैसा ही हो रहा है.पहाड़ - सा बोझ उठाना पड़ रहा है ,बच्चों के लिये,मान-सम्मान के लिये.मगर खुद की वास्तविक जरूरत तो बहुत कम होती है.येक बात समझ में आई नहीं,हाथी का बच्चा यहाँ किस बात का प्रतीक है ?

    ReplyDelete
  2. अगर ध्यान से देखें तो पक्षियों ,जानवरों ही नही कीट-पतंगों से कई स्तरों पर छोटे ही हैं हम । सटीक उदाहरण के माध्यम से आपने बड़ी प्रेरक बात कही है ।

    ReplyDelete
  3. kavita mein kahi ek sundar bodh katha!

    ReplyDelete
  4. मैं समझ नहीं पाया
    बोलते-बोलते चींटी बड़ी होती जा रही थी
    या मैं
    चींटी की तरह छोटा !
    ......सही कहा!

    ReplyDelete
  5. चीटियों से भी कितना कुछ सीखा जा सकता है..पर लगता है अब चीटियों को भी आदमियों की हवा लग गयी है..

    ReplyDelete
  6. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

    ReplyDelete
  7. एक इंसान ही ऐसा जानवर है जिसका पेट भरता ही नहीं. अब इंसान भी वैसे नहीं रहे जो चींटियों से सीख सकें, भले ही उन्हें उस मकड़ी की कहानी ज़ुबानी याद हो जिसने गिर गिर कर चढना सिखाया था एक राजा को!! पाण्डे जी आपकी कबिताई भी कम प्रेरक नहीं है!! :)

    ReplyDelete
  8. आज 09 /जुलाई /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in (कुलदीप जी की प्रस्तुति में ) पर
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  9. बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने। गहरा सन्देश

    ReplyDelete
  10. बेहद गहन भाव ....

    ReplyDelete
  11. Bahut sunder abhivyati...shabdo ka sarthak prayog....

    ReplyDelete
  12. Hello, I enjoy reading all of your article post.
    I wanted to write a little comment to support you.



    Here is my webpage Bunion Pain treatment

    ReplyDelete
  13. I am sure this article has touched all the internet viewers, its really really nice
    article on building up new webpage.

    Feel free to visit my web site; crawlspace encapsulation Indianapolis; ,

    ReplyDelete