3.10.14

कूड़ा

नदी पर पुल
पुल के किनारे कूड़े का ढेर
कूड़े के ढेर पर बच्चे
बच्चों के हाथों में प्लास्टिक के बोरॆ
बोरों में
शाम की रोटी का सपना

पुल के नीचे नदी
नदी में नाला
नाले में डुबकी लगाता आदमी
आदमी के एक हाथ में लोटा
दुसरे में नाक।

न कभी
जल की पवित्रता घटी
न कभी
किसी की नाक कटी
मगर
कुछ तो हुआ है
जो सभी ने
उठा लिये हैं
हाथों में झाड़ू!

8 comments:

  1. कुछ तो हुआ है
    जो सभी ने
    उठा लिये हैं
    हाथों में झाड़ू ............ बेहद सटीक पंक्तियां

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (04-10-2014) को "अधम रावण जलाया जायेगा" (चर्चा मंच-१७५६) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    विजयादशमी (दशहरा) की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. नमस्कार !
    बहुत सुन्दर रचना
    आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा !
    मै आपके ब्लॉग को फॉलो कर रहा हूँ
    मेरा आपसे अनुरोध है की कृपया मेरे ब्लॉग पर आये और फॉलो करें और अपने सुझाव दे !

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  4. बहुत बढ़िया सटीक सामयिक ..
    कुछ तो बात है..बिना कारण हवा भी नहीं बहती

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  5. बहुत कुछ हो गया

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  6. अब आगे उस झाडू का इस्तेमाल भी हो जाए तो सार्थक है उसे उठाना भी ...

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