12.10.20

मुझे आकाश चाहिए

तुम

हवा, जल और धरती का प्रलोभन देते हो

इन पर तो मेरा 

जन्मसिद्ध अधिकार है!


तुमने

सजा रखे हैं 

रंग बिरंगे पिजड़े

और चाहते हो

दाना-पानी के बदले

अपने पंख 

तुम्हारे हवाले कर दूँ?


अपने सभी पिजड़े हटा दो,

मेरे पंख मुझे लौटा दो

मुझे आकाश चाहिए।

8 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (14-10-2020) को   "रास्ता अपना सरल कैसे करूँ"   (चर्चा अंक 3854)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. हर कोई चाहता है इक मुट्ठी आसमान

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  4. मुझे आकाश चाहिए ...बहुत सुन्दर

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  5. बहुत सुंदर

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